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भारतीय सेना के उत्तरी कमांड एवं केंद्रीय कमांड द्वारा “सांस्कृतिक शौर्य संगम” का हुआ आयोजन

देश के प्रतिष्ठित कलाकारों को किया गया सम्मानित

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में भारतीय सेना के थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी जी की मौजूदगी में आज संगम नगरी प्रयागराज के अरेल में
भारतीय सेना के उत्तरी कमांड एवं केंद्रीय कमांड द्वारा “सांस्कृतिक शौर्य संगम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी भी सम्मिलित हुए। मंत्री नन्दी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ दिल्ली से प्रयागराज पहुंचे। प्रयागराज में सेना के अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्री का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिकों के समर्पण और राष्ट्रभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘स्वयं से पहले सेवा’ का उनका आदर्श भारत की सैन्य परंपराओं की आधारशिला रहा है, जो प्राचीन काल से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे समकालीन अभियानों तक निरंतर परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों का शौर्य केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश-विदेश में प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य संकटों के दौरान सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पहुंचते हैं और मानवीय सहायता प्रदान करते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारे सैनिक देशवासियों की सुरक्षा के लिए हथियार उठाते हैं और संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक भोजन, दवाइयां एवं अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाते हैं। यही हमारे रक्षा बलों की सबसे विशिष्ट पहचान और सबसे बड़ी विशेषता है।”

मंत्री नन्दी ने कहा कि यह कार्यक्रम देश की सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय सेना के शौर्य एवं गौरव को समर्पित है।
देश की सेना भारत की सीमाओं पर सजग है, सतर्क है। तभी हम अपने घरों में सुरक्षित हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्थापित किया है।
भारतीय सेना द्वारा आयोजित “सांस्कृतिक शौर्य संगम” कार्यक्रम
देश की सुरक्षा, कला, और सांस्कृतिक गौरव का संगम है। जिसमें सेना की सांस्कृतिक विरासत और वीरतापूर्ण परंपराओं का प्रदर्शन किया गया, जिसमें सैन्य बैंड और प्रसिद्ध कलाकारों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सेना की संस्कृति और वीरता (शौर्य) के मिश्रण को प्रदर्शित करना था।

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