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जिला बार एसोसिएशन की हड़तालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट कमेटी को कार्रवाई के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) की एक जिला बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार कामकाज से दूर रहने (हड़ताल) के प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्टकी तीन जजों की कमेटी को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को बताया गया कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चार महीने से भी कम कार्यकाल में 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल रही है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर की डिस्ट्रिक्ट सिविल और क्रिमिनल बार एसोसिएशन लगातार कामकाज से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करती रही है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें। इस रिपोर्ट में उन सभी कार्य दिवसों का विवरण होगा, जब बार एसोसिएशन के प्रस्तावों के कारण वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई।मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमेटी से कहा कि जिला जज की रिपोर्ट पर विचार कर 2024 के आदेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। यह आदेश फैजाबाद बार एसोसिएशन मामला में पारित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए थे।

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जिला बार एसोसिएशन की हड़तालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट कमेटी को कार्रवाई के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) की एक जिला बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार कामकाज से दूर रहने (हड़ताल) के प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्टकी तीन जजों की कमेटी को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को बताया गया कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चार महीने से भी कम कार्यकाल में 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल रही है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर की डिस्ट्रिक्ट सिविल और क्रिमिनल बार एसोसिएशन लगातार कामकाज से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करती रही है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें। इस रिपोर्ट में उन सभी कार्य दिवसों का विवरण होगा, जब बार एसोसिएशन के प्रस्तावों के कारण वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई।मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमेटी से कहा कि जिला जज की रिपोर्ट पर विचार कर 2024 के आदेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। यह आदेश फैजाबाद बार एसोसिएशन मामला में पारित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए थे।

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जिला बार एसोसिएशन की हड़तालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट कमेटी को कार्रवाई के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) की एक जिला बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार कामकाज से दूर रहने (हड़ताल) के प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्टकी तीन जजों की कमेटी को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को बताया गया कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चार महीने से भी कम कार्यकाल में 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल रही है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर की डिस्ट्रिक्ट सिविल और क्रिमिनल बार एसोसिएशन लगातार कामकाज से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करती रही है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें। इस रिपोर्ट में उन सभी कार्य दिवसों का विवरण होगा, जब बार एसोसिएशन के प्रस्तावों के कारण वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई।मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमेटी से कहा कि जिला जज की रिपोर्ट पर विचार कर 2024 के आदेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। यह आदेश फैजाबाद बार एसोसिएशन मामला में पारित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए थे।

जिला बार एसोसिएशन की हड़तालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट कमेटी को कार्रवाई के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) की एक जिला बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार कामकाज से दूर रहने (हड़ताल) के प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्टकी तीन जजों की कमेटी को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को बताया गया कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चार महीने से भी कम कार्यकाल में 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल रही है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर की डिस्ट्रिक्ट सिविल और क्रिमिनल बार एसोसिएशन लगातार कामकाज से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करती रही है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें। इस रिपोर्ट में उन सभी कार्य दिवसों का विवरण होगा, जब बार एसोसिएशन के प्रस्तावों के कारण वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई।मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमेटी से कहा कि जिला जज की रिपोर्ट पर विचार कर 2024 के आदेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। यह आदेश फैजाबाद बार एसोसिएशन मामला में पारित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए थे।

जिला बार एसोसिएशन की हड़तालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट कमेटी को कार्रवाई के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) की एक जिला बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार कामकाज से दूर रहने (हड़ताल) के प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्टकी तीन जजों की कमेटी को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को बताया गया कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चार महीने से भी कम कार्यकाल में 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल रही है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर की डिस्ट्रिक्ट सिविल और क्रिमिनल बार एसोसिएशन लगातार कामकाज से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करती रही है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें। इस रिपोर्ट में उन सभी कार्य दिवसों का विवरण होगा, जब बार एसोसिएशन के प्रस्तावों के कारण वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाई।मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमेटी से कहा कि जिला जज की रिपोर्ट पर विचार कर 2024 के आदेश के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। यह आदेश फैजाबाद बार एसोसिएशन मामला में पारित किया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से दूर रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था।सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई बार एसोसिएशन इन निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों को हटाने की कार्रवाई तुरंत की जानी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए थे।

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Lewis Hine

Lewis W. Hine studied sociology before moving to New York in 1901 to work at the Ethical Culture School, where he took up photography to enhance his teaching practices

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